दशहरे के दिन पीएम मोदी ने की बड़ी घोषणा

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विजयादशमी के दिन को भारतीय पुराणों और संस्कृति के साथ ही आज के मॉडर्न समाज में शुरू से ही बहुत बड़ा महत्व दिया जाता है क्योंकि इसी दिन बुराई और असत्य पर अच्छाई और सत्य की जीत हुई थी।

पिछले कुछ समय से चीन के साथ सीमा पर भारतीय जवानों की झड़प देखने को सामने आई थी और इसके बाद इंडियन आर्मी को थोड़ी और मजबूती प्रदान करने के लिए सेंट्रल केबिनेट ने जून 2021 में कुछ फैसले लिए थे।

जिनके तहत एक फैसला तो यह था कि इंडियन आर्मी के लिए काम में आने वाले कुछ हथियारों को सिर्फ भारतीय निर्माणकर्ताओं से ही खरीदा जाएगा।

दूसरा फैसला यह था कि इंडियन आर्मी के लिए युद्ध में काम आने वाले हथियारों की सप्लाई करने के लिए बनाए गए ऑर्डनेन्स बोर्ड यानी कि आयुध निदेशालय के मैनेजमेंट, कंट्रोल और डेली लाइफ फंक्शनिंग को लेकर कुछ बदलाव किया जाना तय किया गया था।

15 अक्टूबर 2021 को यानी कि विजयादशमी के दिन ही अब इस ऑर्डनेन्स बोर्ड (Ordnance Factory Board) को 7 अलग-अलग सरकारी कंपनियों (Public Sector Undertakings) में बांट दिया गया है।

जहां एक तरफ पिछले कुछ समय से प्राइवेटाइजेशन को लेकर मोदी सरकार की आलोचना की जा रही है, वहीं सरकार के द्वारा आर्मी को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया यह कदम सराहनीय है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड (Ordnance Factory Board) की स्थापना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया के समय 1712 में कोलकाता में की गई थी, जो कि उस समय ब्रिटिश ईस्ट इंडिया आर्मी बटालियन को हथियारों की सप्लाई का काम किया करती थी और यह संस्था आज के समय डिफेंस मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है।

इंडियन ऑडनेंस फैक्ट्री ऑर्गेनाइजेशन संस्था 41 अलग-अलग फैक्ट्रियों की एक संयुक्त फैमिली है जो कि भारतीय थल सेना के साथ ही भारतीय जल सेना और वायु सेना तथा इसके साथ साथ दूसरे अर्द्ध-सैनिक बलों को भी हथियार सप्लाई करने का काम करती है।

नई बनाई गई 7 कम्पनियाँ :- 

  1. Advanced Weapons and Equipment India Limited
  1. Munitions India Limited
  1. Armoured Vehicles Nigam Limited
  1. Gliders India Limited
  1. Troop Comforts Limited
  1. India Optel Limited
  1. Yantra India Limited

अब इस ऑर्डनेन्स फैक्ट्री संस्था को अलग कंपनियों में बांटने से सरकार के लिए हथियारों की लीकेज को रोकने और हथियारों को आर्मी बटालियन तक समय पर पहुंचाने के साथ ही विदेशी कंपनियों को सही समय पर टेंडर और सप्लाई की जिम्मेदारी निर्धारित करने में भी आसानी हो जाएगी।

जो कि आने वाले समय में इंडियन आर्मी को मिलने वाले हथियारों की क्वालिटी में भी सुधार के साथ सामने आएगी।

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